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Tuesday, September 20, 2011

"PATHAR"

कभी कभी ख्वाबो में गहराईयों को छुने चला जाता हु 
कभी कभी युहीं आसमान छूके आ जाता हु

युहीं चला हु एक रास्ते पे दो अरमानो को लिए 
कभी कभी दुसरे कदम पे ही पत्थर से टकराता हु

इन रास्तो पे तो पत्थर भी दिल को छु जाते है 
कभी कभी खुदका दिल खुद ही दुखाते चला जाता हु 
पर फिर भी उन पत्थरों से आशियाने बनाते चला जाता हु 

दर्द मेरी किसमत ही सही 
"किसमत हमेशा साथ न देगी " यही सोच मै मुस्काता हु 

एक पुरे चट्टान को पत्थरो में बिखरता देख आया हु 
कभी कभी तरस खाके उन पत्थरो को सहलाता हु 

अपने आंसुओ से उनको चमकाता हु 
कभी कभी उन पत्थरो से "शुक्रिया " तो सुन पाता हु 

ये दुनिया पत्थर-दिल ही सही 
जीना है यहीं 
कभी कभी एक पत्थर सा बन जीने को जी करता है 


पत्थर कभी जलता नहीं 
पर मै जलना चाहता हु 
जब मुझे बुलावा आये 
तो मै जलना चाहता हु 

और कभी कभी मै इंसान बने रहना चाहता हु 
कभी पत्थर बने रहना चाहता हु 

-CRK-

15-09-2011
00.30 AM

1 comment:

  1. WoW... Its really touching..

    and loved this line

    दर्द मेरी किसमत ही सही
    "किसमत हमेशा साथ न देगी " यही सोच मै मुस्काता हु

    keep it up ....CRK...

    Keep Moving.. want some more from you...

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