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Saturday, August 6, 2011

यादो का बसेरा 
जब हम आये थे
किसे पता था कहाँ जायेंगे |
चलते हुए इन रास्तो पे
नहीं सोचा था तुमसे मिल पाएंगे |
जब मिले थे तुमसे 
सोचा भी न था इतना घुल मिल जायेंगे |
जब भी न आएगा पैगाम तुम्हारा 
ये आंसू चालक छलक जायेंगे |
याद है तुम्हे हँसाने के लिए 
कुछ अजीबो-गरीब कर जाते थे |
और तुम भी जो पागल थे 
हमारी हरकतों पे मुस्कुराते थे |

पहले तुम्हारे गुस्से को हम मजाक बनाते थे 
तुम्हे चिढाके हम मज़ा उठाते थे |
फिर तुम हमारे पीछे दौड़े चले आते थे 
और तुम्हे थका हुआ देख हम खुद ही रुक जाते थे |

पहले खुशियों में यूँ झूम उठता था दिल 
क्यूंकि हम तुम्हे साथ पाते थे |
और जब भी थे गम में डूबे 
हमेशा आस पास तुम्हे पाते थे |

वो आंटी के हाथ की रोटी 
हम सब मिल-बाँट के खाते थे |
हमने ज्यादा खा लिया 
तो तुम मुंह फुलाए चले जाते थे |

मम्मी को जाके घर में कहते माँ कल से दो टीफीन देना 
मेरे दोस्त सब खा जाते है |
दो टीफीन भी कम पड़ता था 
क्यूंकि पांच दोस्त और आ जाते थे |

अगर कोई आँख उठाये 
तो सब आगे आ जाते थे |
और अकेले में मस्ती में 
एक दुसरे की आँखे नोच जाते थे |

यादो में आज भी वो सारे पल जिंदा है 
सब कुछ वही है बस तुम्हारी ही कमी है |
तुम्हे कैसे बताऊ कि क्या मेरा हाल है 
ये सब कुछ लिखते वक़्त बस आँखों में नमी है |

कुछ दूर चला जाऊं भी तो 
तुम्हे भूल न पाउँगा |
ज़िन्दगी भर इन पलों को याद कर 
मन ही मन मुस्कुराऊंगा |
........मन ही मन मुस्कुराऊंगा 
........तुम्हारी यादो में खो जाऊंगा 
........हलकी सी आँखे भी गीली कर जाऊंगा 
........फिर भी मुस्कुराऊंगा 
.........मन ही मन मुस्कुराऊंगा 
-C R K-

In the loving memories of all my friends
those days were just amazing part of my life
 THANKS A LOT
to my dear friends
for being a part of my life

LOVE U ALL

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