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Friday, December 30, 2011

FEMALE INFANTICIDE



एक अजन्मी जान की सुन लो |
माँ की ज़ुबानी  ||
इस मतलबी दुनिया ने क्यों ली |
फिर बच्ची की क़ुरबानी ||

क्या बीती उस माँ पे सोचो |
कैसे होगा उसका बदन थर्राया ||
जब उसकी सास कही "बहु तुम्हारी कोख मे थी एक बच्ची
जिसे हमने है गिरवाया "||

माँ क्या कहती उन हत्यारों से |
वो जो ठहरे अपने ||
माफ़ी मांगी अपनी बच्ची से  |
जो तोड़े उसके सपने ||

अचछा हुआ जो तुने ये दुनिया नहीं दखी |
जिसमे अपने हो हत्यारे ||
ले लेना जन्म लड़के के रूप मे |
कर लेना पुरे अपने सपने सारे ||

बस माफ़ करना अपनी इस माँ को   |
जो तुझे बचा ना पायी  ||
क्या करू कमज़ोर जो हु मै |
इस दुनिया मे ममता कहाँ टिक पायी  ||

इस बार जो हुआ वो  |
फिर कभी ना दोहरौंगी  ||
आगे चाहे हो लड़का या लड़की   |
इस दुनिया मे लाऊंगी  ||

Tuesday, September 20, 2011

"PATHAR"

कभी कभी ख्वाबो में गहराईयों को छुने चला जाता हु 
कभी कभी युहीं आसमान छूके आ जाता हु

युहीं चला हु एक रास्ते पे दो अरमानो को लिए 
कभी कभी दुसरे कदम पे ही पत्थर से टकराता हु

इन रास्तो पे तो पत्थर भी दिल को छु जाते है 
कभी कभी खुदका दिल खुद ही दुखाते चला जाता हु 
पर फिर भी उन पत्थरों से आशियाने बनाते चला जाता हु 

दर्द मेरी किसमत ही सही 
"किसमत हमेशा साथ न देगी " यही सोच मै मुस्काता हु 

एक पुरे चट्टान को पत्थरो में बिखरता देख आया हु 
कभी कभी तरस खाके उन पत्थरो को सहलाता हु 

अपने आंसुओ से उनको चमकाता हु 
कभी कभी उन पत्थरो से "शुक्रिया " तो सुन पाता हु 

ये दुनिया पत्थर-दिल ही सही 
जीना है यहीं 
कभी कभी एक पत्थर सा बन जीने को जी करता है 


पत्थर कभी जलता नहीं 
पर मै जलना चाहता हु 
जब मुझे बुलावा आये 
तो मै जलना चाहता हु 

और कभी कभी मै इंसान बने रहना चाहता हु 
कभी पत्थर बने रहना चाहता हु 

-CRK-

15-09-2011
00.30 AM

Saturday, August 6, 2011

यादो का बसेरा 
जब हम आये थे
किसे पता था कहाँ जायेंगे |
चलते हुए इन रास्तो पे
नहीं सोचा था तुमसे मिल पाएंगे |
जब मिले थे तुमसे 
सोचा भी न था इतना घुल मिल जायेंगे |
जब भी न आएगा पैगाम तुम्हारा 
ये आंसू चालक छलक जायेंगे |
याद है तुम्हे हँसाने के लिए 
कुछ अजीबो-गरीब कर जाते थे |
और तुम भी जो पागल थे 
हमारी हरकतों पे मुस्कुराते थे |

पहले तुम्हारे गुस्से को हम मजाक बनाते थे 
तुम्हे चिढाके हम मज़ा उठाते थे |
फिर तुम हमारे पीछे दौड़े चले आते थे 
और तुम्हे थका हुआ देख हम खुद ही रुक जाते थे |

पहले खुशियों में यूँ झूम उठता था दिल 
क्यूंकि हम तुम्हे साथ पाते थे |
और जब भी थे गम में डूबे 
हमेशा आस पास तुम्हे पाते थे |

वो आंटी के हाथ की रोटी 
हम सब मिल-बाँट के खाते थे |
हमने ज्यादा खा लिया 
तो तुम मुंह फुलाए चले जाते थे |

मम्मी को जाके घर में कहते माँ कल से दो टीफीन देना 
मेरे दोस्त सब खा जाते है |
दो टीफीन भी कम पड़ता था 
क्यूंकि पांच दोस्त और आ जाते थे |

अगर कोई आँख उठाये 
तो सब आगे आ जाते थे |
और अकेले में मस्ती में 
एक दुसरे की आँखे नोच जाते थे |

यादो में आज भी वो सारे पल जिंदा है 
सब कुछ वही है बस तुम्हारी ही कमी है |
तुम्हे कैसे बताऊ कि क्या मेरा हाल है 
ये सब कुछ लिखते वक़्त बस आँखों में नमी है |

कुछ दूर चला जाऊं भी तो 
तुम्हे भूल न पाउँगा |
ज़िन्दगी भर इन पलों को याद कर 
मन ही मन मुस्कुराऊंगा |
........मन ही मन मुस्कुराऊंगा 
........तुम्हारी यादो में खो जाऊंगा 
........हलकी सी आँखे भी गीली कर जाऊंगा 
........फिर भी मुस्कुराऊंगा 
.........मन ही मन मुस्कुराऊंगा 
-C R K-

In the loving memories of all my friends
those days were just amazing part of my life
 THANKS A LOT
to my dear friends
for being a part of my life

LOVE U ALL