एक अजन्मी जान की सुन लो |
माँ की ज़ुबानी ||
इस मतलबी दुनिया ने क्यों ली |
फिर बच्ची की क़ुरबानी ||
क्या बीती उस माँ पे सोचो |
कैसे होगा उसका बदन थर्राया ||
जब उसकी सास कही "बहु तुम्हारी कोख मे थी एक बच्ची
जिसे हमने है गिरवाया "||
माँ क्या कहती उन हत्यारों से |
वो जो ठहरे अपने ||
माफ़ी मांगी अपनी बच्ची से |
जो तोड़े उसके सपने ||
अचछा हुआ जो तुने ये दुनिया नहीं दखी |
जिसमे अपने हो हत्यारे ||
ले लेना जन्म लड़के के रूप मे |
कर लेना पुरे अपने सपने सारे ||
बस माफ़ करना अपनी इस माँ को |
जो तुझे बचा ना पायी ||
क्या करू कमज़ोर जो हु मै |
इस दुनिया मे ममता कहाँ टिक पायी ||
इस बार जो हुआ वो |
फिर कभी ना दोहरौंगी ||
आगे चाहे हो लड़का या लड़की |
इस दुनिया मे लाऊंगी ||

