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Friday, December 30, 2011

FEMALE INFANTICIDE



एक अजन्मी जान की सुन लो |
माँ की ज़ुबानी  ||
इस मतलबी दुनिया ने क्यों ली |
फिर बच्ची की क़ुरबानी ||

क्या बीती उस माँ पे सोचो |
कैसे होगा उसका बदन थर्राया ||
जब उसकी सास कही "बहु तुम्हारी कोख मे थी एक बच्ची
जिसे हमने है गिरवाया "||

माँ क्या कहती उन हत्यारों से |
वो जो ठहरे अपने ||
माफ़ी मांगी अपनी बच्ची से  |
जो तोड़े उसके सपने ||

अचछा हुआ जो तुने ये दुनिया नहीं दखी |
जिसमे अपने हो हत्यारे ||
ले लेना जन्म लड़के के रूप मे |
कर लेना पुरे अपने सपने सारे ||

बस माफ़ करना अपनी इस माँ को   |
जो तुझे बचा ना पायी  ||
क्या करू कमज़ोर जो हु मै |
इस दुनिया मे ममता कहाँ टिक पायी  ||

इस बार जो हुआ वो  |
फिर कभी ना दोहरौंगी  ||
आगे चाहे हो लड़का या लड़की   |
इस दुनिया मे लाऊंगी  ||